जन धन योजना की प्रगति और अड़चने

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एनडीए सरकार की प्रमुख वित्तीय समावेशन योजनाओं में से एक प्रधानमंत्री जन धन योजना है। वित्त-मंत्रालय ने इस योजना के तहत देश के प्रत्येक परिवार को कम से कम एक बैंक खाते तक पहुँच बनाने में सक्षम बनाया है। केवाईसी में दस्तावेजों की कमी के बावजूद भी सभी भारतीय नागरिक अब एक बैंक खाते का लाभ उठा सकते हैं। ये बैंक के खाते एक वर्ष तक मान्य हैं। खाता धारकों को एक वर्ष के अन्दर ही केवाईसी मानदंडों का पालन करने के लिए और आवश्यक मान्य दस्तावेजों का आवेदन करने का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में इस योजना की घोषणा की थी और 28 अगस्त 2014 को इस योजना को जारी कर दिया गया था। इस योजना के तहत खोले गए बैंक खातों में रूपे डेबिट कार्ड और दुर्घटना बीमा कवर प्रदान किया जाता है। 26 जनवरी 2015 से पहले जिन लोगों ने खाते खुलवाए हैं, उन खाता धारकों को प्रीमियम-मुक्त जीवन बीमा कवर प्रदान किया गया है।

प्रधानमंत्री जन धन योजना की वेबसाइट

भारत सरकार ने 27 अक्टूबर 2014 को प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) के लिए एक वेबसाइट की शुरुआत की थी। यह पोर्टल अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने पोर्टल का शुभारम्भ, सभी सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन की सुविधा और सक्षम प्रौद्योगिकी डिजिटल इंडिया की महत्वाकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए किया था। वित्तीय सेवा विभाग के सचिव जी. एस. संधू ने नई दिल्ली में इस वेबसाइट की शुरूआत की। उन्होंने वेबसाइट का शुभारम्भ करते समय कहा, “यह वेबसाइट योजनाओं के बारे में आसान पहुँच, प्रशासनिक कार्यों की निगरानी, ​​योजना की प्रगति, खाता खोलने वाले फॉर्म की उपलब्धता और शहरी और ग्रामीण आबादी के लिए वित्तीय साक्षरता की जानकारी प्रदान करेगी।” इस पोर्टल में विभिन्न योजना निर्देशकों और सभी मुख्य अधिकारियों के संपर्क विवरण के अलावा, सरकार के परिपत्र, मीडिया अभियान और कार्यक्रमो से संबंधित अपडेट सहित योजना संबंधी सभी विवरण शामिल हैं। वर्तमान में इस साइट में परिपत्र, प्रगति सूचना, मीडिया अभियान के साथ अन्य अनुभाग भी शामिल हैं। यह राष्ट्रीय टोल फ्री नंबरों को प्रदर्शित करता है और वित्त मंत्रालय से सीधे संपर्क करने की अनुमति भी देता है। इस साइट को योजनाओं की जानकारी के लिए सोशल मीडिया के साथ जोड़ा गया है।

बेमिसाल प्रगति

वित्त मंत्रालय के आधिकारिक बयान के मुताबिक, प्रधानमंत्री जन धन योजना को बेमिसाल सफलता मिली है। इस योजना के तहत बैंकों में शुभारंभ के पहले दिन ही 1.5 करोड़ से अधिक खाते खोले गए थे। 22 अक्टूबर 2014 तक की रिपोर्ट से पता चलता है कि इस योजना के तहत बैंक में 6.47 करोड़ खाते खोले जा चुके हैं। अभी भी बैंक में हर दिन लगभग एक लाख खाते खोले जा रहे हैं। इस योजना के तहत बैंकों में जमा राशि के रूप में बाजार से जुटाई गई कुल राशि 4,813.59 करोड़ रुपये है। इस योजना के लांच से पहले, यह पूंजी बैंकिंग के विषेश पक्ष वाले क्षेत्र के दायरे से बाहर रहेगी।

द्वितीय चरण के लाभ

26 जनवरी 2015 को प्रधानमंत्री जन धन योजना का पहला चरण समाप्त हो जाएगा और दूसरे चरण का शुभारंभ किया जाएगा। इस चरण के चलते, वित्त मंत्रालय ने भारत के सबसे बड़े जीवन बीमा प्रदाता, लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (एलआईसी) और अन्य सभी सरकारी स्वामित्व वाली सामान्य बीमा कंपनियों को योजना के तहत आने वाले व् सभी बैंक खाता धारकों को बेचे जाने वाले उत्पादों के विवरण को अंतिम रूप देने के लिए कहा है। वित्त मंत्रालय के संयुक्त सचिव अनूप वाधवा ने दूसरे चरण की योजनाओं की तैयारियों की प्रगति की समीक्षा के लिए अक्टूबर में एक बैठक आयोजित की है। दूसरे चरण के लिए लगभग 15 सूक्ष्म-बीमा उत्पादों की पहचान की गई है, इन्हें पीएमजेडीवाई खाता धारकों को बेचा जाएगा। उनमें से कुछ जैसे फसल बीमा को ग्रामीण क्षेत्रों में लक्षित करने की संभावना है, जबकि जीवन बीमा सभी खाताधारकों को लाभान्वित कर सकता है। जबकि द्वितीय चरण जनवरी में लागू होना निर्धारित हुआ है, वहीं समाचार रिपोर्टों का कहना है कि कई राज्यों में बीमा प्रदाताओं ने पहले से ही, इन सूक्ष्म-बीमा उत्पादों को पीएमजेडीवाई खाता धारकों को कम मूल्यों पर बेचना शुरू कर दिया है।

अधिक बिलंब और चिंताएं

एक बहुत ही सफल शुरुआत के बाद भी पीएमजेडीवाई में देरी हो रही है और इस योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के बारे में चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। अक्टूबर की शुरुआत में लगभग 5.29 करोड़ खाते खोले गये, लेकिन केवल 1.78 करोड़ रुपे कार्ड ही जारी किए गए थे। रुपे डेबिट कार्ड इस योजना का मुख्य आकर्षण है जो खाता धारकों को जीवन और दुर्घटना बीमा कवर प्रदान करने का वादा करता है। समाचार रिपोर्टों में बताया गया है कि डेबिट कार्ड की आपूर्ति की कमी को दोषी ठहराया गया है और अधिकारी डेबिट कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को तेज करने की कोशिश कर रहे हैं। अगर आपूर्ति की कमी बनी रहती है, तो समस्या बढ़ सकती है, अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्ष 2015 तक इस योजना में लगभग 10 करोड़ डेबिट कार्डों की आवश्यकता होगी।

खातों की पुनरावृत्ति की एक नई समस्या सामने आई है। केवाईसी में नियमों की कमी के कारण एक खातेदार कई बीमा पॉलिसियों का लाभ उठाने के लिए, विभिन्न बैंकों में आसानी से कई खाते खुलवा सकते हैं। पर्याप्त दस्तावेजों के बिना ओवरड्राफ्ट सुविधा का प्रावधान एक और चिंता का कारण है। इन चिंताओं को अभी तक संबोधित नहीं किया गया है। खातों में आधार कार्ड को जोड़ना एकमात्र संभव समाधान है और बैंक इस दिशा में काम कर रही हैं।